Home Hindiचातुर्मास प्रवचन – 15

चातुर्मास प्रवचन – 15

by Devardhi
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आप उत्तम श्रवण करें . श्रवण , जीवन को उपयोगी होने वाली बातों का भी होता है . श्रवण कहानियों का भी होता है . श्रवण कविता , शेरोशायरी और रौजाना सुवाक्यों का भी होता है . आप हंमेशा इसे उत्तम श्रवण मान लेते हो . ये तो उत्तम है ही . एक और विषय है जिसे उत्तम श्रवण का विशेष गौरव मिलता है ~ वह है आत्मा के विषय में जानकारी बढाने वाला श्रवण . आत्मा के विषय में जो बोला जाता है या लिखा जाता है वह एकदम सरल नहीँ होता है . अब जो सरल नहीँ है उससे हम दूर भागते हैं . जीवन विषयक उपदेश सरल होता है और वह उपयोगी भी होता है . आत्मा विषयक उपदेश सरल नहीँ होता है लेकिन उसकी उपयोगिता उत्कृष्ट होती है .
रोज रात को सोने से पूर्व खुद को दो सवाल पूछिये . एक , आज मैंने आत्म तत्त्व के विषय में क्या नया जाना ? दो , आज मैंने मेरी आत्मा को काम लगे ऐसा क्या सीखा , सुना ?
आप क्रोध या चिंता या क्षुल्लक विचारों को मिटाने वाले उपदेश सुने यह जरूरी है साथ साथ यह विशेष जरूरी है कि आप का तात्त्विक आत्मचिंतन बढें इस प्रकार का उपदेश भी आप सुने .
आप के शरीर के भीतर आत्मा रहती है और आप आत्मा के विषय में कुछ नया नया सुनना चाहते नहीं है . ऐसा नहीं होना चाहिये .
हम आसान बातें सुनने के आदती हो गये है तो हम प्रारंभिक बातें सुन कर संतृप्त हो जाते हैं . हमे आत्मा के विषय में थोड़ी भी कठिन बात सुनना रास नही आ रहा है . कहानी या कहानी जैसी सरल बाते सुनने से भी हमे अवश्य लाभ होता है . कोइ भी शुभ श्रवण विफल नही जाता है .
मुद्दा यह है कि आप आत्म तत्त्व विषयक कठिन बाते सुनने से परहेज न करें . आत्मा क्या है , आत्मा को शुद्ध स्वरूप कैसे हांसिल होगा इस दिशा में सोचनेका मार्गदर्शन मिले ऐसे उपदेश सुनने की आदत बना लो .
भावधर्म के लिए आत्मचिंतन की गहराई अति आवश्यक है .

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