Home Hindiचातुर्मास प्रवचन – 11

चातुर्मास प्रवचन – 11

by Devardhi
0 comments

आप के मन का विचार शुभ होना चाहिए . अन्य के प्रति अशुभ भाव नहीं रखना चाहिए . विचार के तरंग बड़े प्रभावशाली होते है . आप मन में द्वेष रखे उससे दूरी और वैमनस्य के तरंग बनते हैं . आप मन में क्रोध और कटुता रखे उससे संक्लेश के तरंग बनते है . आप आदर के मनोभाव रखे उससे सामंजस्य के तरंग बनते है . आप आत्मीयता की मानसिकता रखे उससे एकता के तरंग बनते हैं . सामने वाला आप के
विषय में वही सोचेगा जो आपने पहुंचाया है . मन को अनुचित विचार बना लेने की आदत है . एक एक अनुचित विचार अपने तरंग बनाता है जो अन्य व्यक्ति को प्रभावित करता है . मन को पूर्वग्रह , नाराज़गी ,
विरोधवृत्ति जैसे भावों से मुक्त रखो . आप अच्छा देखो और अच्छा सोचो . आप को जो जो जानते हैं और आप जिसे जिसे जानते हैं वो सब आप के मानसिक तरंगो से प्रभावित हैं . आप उन्हें अच्छे तरंग दीजिये . रेकी और प्राणिक हीलिंग जैसी वैकल्पिक चिकित्सा में मानसिक शुभभाव से बड़े बड़े रोग मिटाए जाते है . आप का शुभ भाव थोड़ा हो तो उसे बढाते रहे . आप के मन का शुभ तत्त्व आप के परिवार , मित्रवर्ग और परिचितों को सकारात्मक ऊर्जा दे वह आप का कर्तव्य है . दान , शील , तप ये तीन जैसे धर्म है वैसे शुभ भाव भी एक शक्तिशाली धर्म है .

You may also like

Leave a Comment

Featured

जैन विद्या केन्द्र

Recent Posts

@2025 All Rights Reserved.