जो चाहा वह नहीं मिला यह छोटी समस्या है . लगभग सभी के साथ यह होता है . आप आसपास देखो . बालक ने जो चाहा वह बालक को मिला नहीँ है . युवक ने जो चाहा वह युवक को मिला नहीँ है . बुझुर्ग ने चाहा वह बुझुर्ग को नही मिला है . महिला ने जो चाहा वह महिला को मिला नही है . सब के साथ यह हो रहा है . आप ने जो चाहा है वह आप को मिल नहीँ रहा है तो यह कोइ बडी समस्या नहीं है .
देखना यह है कि आप ने जो सोचा न था ऐसा सुख भी तो आप को पर्याप्त मात्रा में मिला है . पिछले जनम में आप ने आंखे मांगी नहीं थी पर आंखे मिली आप को , आप ने कान मांगे नहीं थे लेकिन कान मिले आप को . घर और स्वजन मांगे नहीं फिर भी अच्छेवाले घर और स्वजन मिले है आप को . पैसा मांगा नहीं था लेकिन मिला भरपुर . आदर सत्कार मांगे नहीं थे लेकिन अच्छेखासे मिले . जो सोचा न था ऐसा बहोत कुछ आप को मिल चुका है तो आप को उसकी खुशी अखंड रखनी चाहिये .
कुछ कुछ न मिले हुए संसाधन के लिये भीतर से दुःखी मत रहो . पुण्य से जो मिल सकता है वह आप के पास है . अब एकादबार पुण्य कम पडे तो उसमें अधिक तनाव लेना नहीं है .
पुण्य और सुख की जोडी है वैसे पाप और दुःख की जोडी होती है . आप का सुख आप के पूर्व कृत पुण्य की निशानी है . आप का दुःख आप के पूर्व कृत पाप की निशानी है . एकाद सुख अप्राप्त दिखता है मतलब पुण्य थोड़ा कम है . पुण्य का अभाव बड़ी समस्या है उसके मुकाबले कम पुण्य यह छोटी समस्या है . पाप का तीव्र उदय बड़े दुःख देता है . पापोदय की तीव्रता कम हो तब दुःख भी कम ही रहता है . कुछ दुःख आप के जीवन में नहीँ है जो अन्य के जीवन में है . वहां आप को आप के पापोदय की कमी नज़र आ जाएगी .
जो सुख नही है उसे मत रोइए .
जो दुःख नही है उसका आश्वासन रखिये .

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